स्वादिष्ट खाने में किरासन तेल के बूंद की तरह हैं माओवादी : बाबूलाल मरांडी, कहानी जीतन मरांडी की भाग बारह

जीतन मरांडी, जो संस्कृतकर्मी हैं, उन्हें इतने दिनों तक जेल में रहना पड़ा। इसके लिए मैं किसी को दोष नहीं दूंगा  इस घटना को

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नक्सली घटना के अलावे किसी अन्य तरह का मामला बहुत कम दर्ज होता है, क्यों? कहानी जीतन मरांडी की भाग पांच

जीवन और बारूद की आवाज जीवन में एक नया अध्याय जुड़ जाता है। क्षेत्र में नक्सलवाद का प्रचार हो चुका था। लेकिन नजर धुंधला

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जेहाद ने तो मुस्लिम और काफिर के बीच का फर्क खत्म कर दिया है : सुशांत

सुशांत सिंह को आज लोग सावधान इंडिया के कारण घर – घर में जानने लगे हैं। लेकिन इस कलाकार ने जिस फिल्म में काम

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नक्सलवादी और माओवादी में बड़ा फर्क : राहुल पंडिता

प्रधानमंत्री माओवादी को देश की सबसे बड़ी समस्या करार देते हैं। लेकिन क्या यह देश और इसकी राजनैतिक व्यवस्था ही इसके लिए जिम्मेदार नही

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