क्रांति, समाजवाद, माओवाद जैसे शब्द तो भूलकर भी नहीं लिखता था : कहानी जीतन मरांडी की भाग दस

अंडा सेल में लेकिन गलत यह हुआ कि मुझे अंडा सेल में डाल दिया गया। जेलर बोला कि ऊपर से आदेश है। हम कुछ

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23 जून 2011 को मिल गई फांसी : कहानी जीतन मरांडी की भाग आठ

जेल में शुरू कर दिया चाय-समोसे की दुकान गिरिडिह जेल में ही इस बीच पैसे की कमी को देखते हुए मैंने जेलर से कहा

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नक्सलवादी नहीं आते तो उन्हें जंगल में रहने का हक ही नहीं मिलता : कहानी जीतन मरांडी की भाग चार

नक्सलवाद और मेरा जन्म मैंने गरीब किसान परिवार में करीब 80 के दशक में झारखंड के एक गांव में जन्म लिया। स्कूल में मात्र

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कहानी जीतन मरांडी की – भाग एक

  नाम जीतन मरांडी गांव – करंदो ब्लॉक – पीरटांड़ जिला – गिरिडीह जन्मतिथि – 21 सितंबर, 1981 पेशा – संस्कृतिकर्मी , सामाजिक कार्यकर्ता

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