रांची के पानी में दस गुना अधिक सेलेनिमय की मात्रा

रांचीवासियों को आर्सेनिक और फ्लोराइड के बाद अब सेलेनिमय से भी लड़ना होगा. रांची के पानी में इसकी मात्रा पांच गुना बढ़ गई है. बिड़ला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (बीआईटी) मेसरा के रिसर्च में यह बात सामने आई है. तय मानक के मुताबिक यह 0.1 एमजी प्रति लीटर से बढ़कर 0.137 एमजी प्रति लीटर हो गया है. ऐसे पानी का इस्तेमाल करनेवाले लोगों की छोटी आंत को बुरी तरह प्रभावित कर सकता है. इसके साथ ही फेफड़े, चमड़ों से संबंधित रोग भी हो सकते हैं. अगर लगातार सेवन करते रहे तो यह कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का कारण भी हो सकता है.

कोकर, अपर बाजार, धुर्वा में सबसे अधिक

शहर के कोकर, अपर बाजार, धुर्वा में तो यह सबसे अधिक 0.14 पहुंच चुका है. इसके अलावा नामकुम, मेन रोड, बरियातू, कांके सहित कई अन्य इलाकों से लिए गए. सब जगहों पर इसकी मात्रा अधिक है. बीआईटी मेसरा में सिविल एंड इनवारामेंट इंजीनियरिंग विभाग की प्रोफेसर तनुश्री भट्टाचार्य ने रांची शहर के कुल 44 जगहों से ग्राउंड वाटर, सरफेस वाटर का एक साल तक सैंपल लिया. यह मानसून से पहले, मानसून और मानसून के बाद का सैंपल है. उन्होंने बताया कि आर्सेनिक, फ्लोराइड का तो पता था, सेलेनिमय का मिलना चौंकाने वाली बात रही.

मछली के अंडो पहुंचाता है नुकसान

इंसानों के साथ यह जलीय जीव जंतु को भी भारी नुकसान पहुंचा सकता है. यह मछली के प्रोटीन में जाकर घुल जाता है. जलीय पक्षी के अंडा को नष्ट कर सकता है. जिससे नई पीढ़ी के पक्षियों के आने पर ही संकट पैदा हो सकता है. विश्व स्वास्थ्य संगठन ने साल 2014 में इसपर एक बड़ी रिपोर्ट सौंपी थी. जिसमें कहा गया था कि इसके असर से बालों का झरना, नाखून कमजोर होकर टूटने लगता है, स्किन में छाले, मेंटल डिसऑर्डर भी होते हैं.

प्रो तनुश्री भट्टाचार्य

रिस रहा है कचरा डंप यार्ड और प्राकृतिक पहाड़ियों से

प्रो. तनुश्री के मुताबिक यह कोल बेल्ट, कचरा डंप यार्ड और प्राकृतिक पहाड़ियों से रिस कर आ रहा है. यह पानी मे ऑक्सीजन की मात्रा को घटाता है. आर्सेनिक और फ्लोराईड भी सभी जगहों पर बराबर मात्रा में है. उनके साथ रिसर्च स्कॉलर पूनम तिर्की ने भी इस प्रोजेक्ट में काम किया है. उन्होंने बताया कि इससे बचने के लिए पानी सप्लाई होने से पहले ट्रीट करना होगा. ग्राउंड वाटर को भी ट्रीटमेंट के बाद ही पीना चाहिए.

Please follow and like us:

Comment via Facebook

comments