मेरे चेहरे की तरह बिहार पूरा चमक गया है : लालू प्रसाद

रांची स्टेट गेस्ट हाउस में हेमंत सोरेन से बंद कमरे में लगभग दस मिनट की बातचीत के बाद दोनों ने मीडिया को संयुक्त रूप से संबोधित किया। कहा इनको आमंत्रित करने आए हैं, सबको एकजुट होना पड़ेगा। बातचीत खत्म होने के बाद जब हेमंत सोरेन जाने लगे तो लालू प्रसाद को सेफे से उठने में परेशानी हुई। क्योंकि वह उसमें धंस गए थे। सहारा देकर उठाया गया, तपाक से हेमंत से कहा कि इसको ठीक काहे नहीं करवाता है जी? कुछ सेकेंड की चुप्पी के बाद हेमंत बोले अगली बार से यहां आपको नहीं रुकवाएंगे, घर पर रखेंगे। इसके बाद लालू प्रसाद यादव ने खुलकर बातचीत की। पेश है अंश

राजनीति का मतलब जीवन भर कोर्ट कचहरी का चक्कर लगाना कब तक चलेगा? 
भांति - भांति के लोग हैं। पॉलिटिकल स्तर लोगों का गिर गया है। अब राजनीति नहीं होती है, उससे कोई मुकाबला नहीं कर पाता है। कोर्ट कचहरी का शरण लेकर एक दूसरे की लेग पुलिंग का काम करते हैं। यह ठीक बात नहीं है। हमारे ऊपर जितने भी मुकदमे हुए हैं, सब बीजेपी और विपक्ष के द्वारा किया गया है। तंग तबाह कर दिया है।

आप खुद कब तक कोर्ट का चक्कर लगाते रहेंगे?
अब तो लगता है कि जिनगी भर लगाना पड़ेगा।

आपके समय से ही बिहार के एजुकेशन सिस्टम की छीछालेदर हो रही है? 
छीछादेलर नहीं हो रहा है। यह मानते हैं कि बिहार का प्राइमरी से लेकर ग्रैजुएशन तक की पढ़ाई व्यवस्था बहुत ठीक नहीं है। गुणवत्ता में कमी है, शिक्षकों की क्वालिटी कम है। लेकिन इससे ऊपर जाकर देखिये, सबसे अधिक ब्यूरोक्रैट वहीं से पास होते हैं।

चरवाहा विद्यालय बंद पड़े हैं, वहां कंप्यूटर क्यों नहीं लगवा देते हैं? 
अब चरवाहा ही नहीं है, तो बंद है। हम क्या करें। यह एक मैसेज था। चरवाहा विद्यालय वाज ए मैसेज। वहां कंप्यूटर लगाना फालतू बात है। चरवाही बंद हो गया है, समाज में बदलाव आया है।

आपके दोनों बेटों के एजुकेशन क्वालिटी पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं? 
ऐसा नहीं है। उसके उम्र प्रमाणपत्र पर सवाल उठ रहे हैं। वह भी कलर्कियल गलती की वजह से हुआ है। उसको ठीक कराने के लिए आवेदन दे दिया गया है।

तेजप्रताप तो स्वास्थ्य व्यवस्था ठीक करने के बजाय बांसुरी बजाने में व्यस्त हैं? 
वह धार्मिक है, तो मंदिर नहीं जाएगा? बांसुरी बजाना कला है, बजाएगा नहीं? आपको आता है बांसुरी बजाना? शंख फूकना आता है?
(कार्यकर्ताओं से कहते हैं कि शंख लाओ जी। दीजिए पत्रकार जी को बजाएंगे)...ऐसा नहीं है। वह काम भी कर रहा है। अधर्मी नहीं है न जी बीजेपी के नेताओं की तरह।

अब तक के सबसे कमजोर विपक्ष में केवल आप ही क्यों हैं बोलनेवाले? 
सब अपने हिसाब के विरोध करते हैं। लेकिन कई बार एक नहीं हो पाते हैं। जगह जगह बंटवारा हो जाता है। पार्टियां बहुत हो जाती है। पहले लोग टिकट के लिए केवल दिल्ली का चक्कर लगाते थे। अब हम यहां बैठे - बैठे संसद से विधानसभा तक का टिकट बांट रहे हैं। इसके बारे में कभी सोचा नहीं था। आपस की टकराहट है। मानता हूं। इसी रोकने के लिए हम काम कर रहे हैं।

बीजेपी का पूजापाठ कर्मकांड माना जाता है, आप करते हैं तो धर्मनिरपेक्षता कही जाती है?
बीजेपी ने धर्म, मंदिर, गाय को वोट में बदल दिया है। उसका लाभ उठाता है। कर्मकांडी है ही। फासिस्ट तो है ही इ लोग। सब खत्म करेंगे हम। आने दो समय।

इधर रघुवर दास हाथी उड़ा रहे हैं? 
हंसते हुए। देश का पहिला सीएम देखे हैं जो हाथी उड़ा रहा है। अपने भी उड़ रहा है।

फुलवरिया (लालू यादव का पैतृक गांव) का युवा सवाल कर रहा है कि वहां एक हाईस्कूल तक नहीं बनवा सके? 
कुछ देर की चुप्पी के बाद...अरे बाकि सब चीज तो है ना। स्कूल तो है ही, हाईस्कूल के लिए आसपास तो जा रहा है युवा। लड़के लड़कियां सब पढ़ रहे हैं। राबड़ी देवी के गांव में भी स्कूल है। आपको गलत जानकारी दी गई है।

राष्ट्रीय स्तर पर आपकी चर्चा भले ही अधिक हो, लेकिन मधेपुरा, सोनपुर, राघोपुर, छपरा में सिमटता जा रहा है? 
कहां कटते जा रहे हैं। सब सटते जा रहे हैं। ऐसा नहीं है, काम हो नहीं हो, सबको बुलाकर बात करते हैं। वहां का गेट हमरे लिए हमेशा खुला रहता है। पेशेंट हियरिंग देते रहते हैं।

ताड़ी बेचनेवाले पहले आपकी तरफ देखते थे, अब कोई नहीं है?
ऐसा नहीं है उनके लिए निरा बनवाया जा रहा है। वह बिक रहा है। हमने करवाया है ऐसा।

जितनी चमक आपके चेहरे पर है, बिहार कब चमकेगा? 
बिहार चमक रहा है। बहुत चमक रहा है। हम क्रीम नहीं ना लगाते हैं जी, फिटकीरी लगाते हैं। इसलिए चमक रहे हैं।

जब बिहार चमक रहा है तो स्पेशल पैकेज क्यों मांग रहे हैं? 
पैकेज के बारे में केंद्र बोला था तो मांगेगे नहीं। देता तो और चमकाते। चलिये अब हो गया, अराम करने दीजिए हमको।
Please follow and like us:

Comment via Facebook

comments