रांची टेस्ट मैच में चोट के कारण विराट नहीं चल सका : राजकुमार

विराट कोहली मेरे लिए हमेशा बच्चा की तरह रहेगा। रजरप्पा मंदिर में भी मैंने पहले उसके लिए आशीर्वाद मांगा। उसकी चोट से थोड़ा चिंतित था। लेकिन अब पहले से बेहतर है। यह कहना है भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान के कोच रहे दिल्ली के राजकुमार शर्मा का। वह पहली बार रांची आए हैं। अपने स्टार शिष्य का मैच देखने। शनिवार की शाम को खेलगांव मुख्य गेट पर खास बातचीत की। पेश है अंश… 

18 मार्च 2017

कोहली से बात हुई है?
हमलोग एक ही होटल में ठहरे हैं तो बात होती रहती है। हर दिन बात होती रहती है। इंजरी के बाद भी बात हुई थी। अभी वो पहले से बेहतर हैं। पूरी तरह नहीं ठीक हुई है, लेकिन ज्यादा घबराने वाली बात नहीं है।

चोट के बाद बैटिंग के लिए उनको आना चाहिए था? 
वह बेहतर फील कर रहे होंगे। इसलिए उतरे। यह उनका निजी फैसला था, टीम का फैसला था।

आपसे किसी तरह की सलाह ली है?
वह तकनीकी वाली बातें हैं, हमलोग आपस में हर दिन करते हैं। वह मैं रिवील नहीं करना चाहूंगा। कुछ कमियां होती हैं, हम विचार करते हैं। हर विपक्षी टीम के खिलाफ हम स्ट्रैटजी बनाते हैं।

मैच से पहले प्रेस कांफ्रेंस में विराट ने कहा कि पूरी ऑस्ट्रेलियाई टीम का फोकस मेरे पर है, ऐसे में अगर मैं नहीं स्कोर कर पा रहा हूं तो टीम के अन्य प्लेयर करें, यह खुद को सांत्वना देनेवाली बात नहीं हुई?
उनका यह मानना बिल्कुल ठीक है। वह हमेशा से टीम को साथ लेकर चलनेवाला प्लेयर रहा है। कभी भी व्यक्तिगत रिकॉर्ड के लिए नहीं खेलते। कई बात तो मैं फोन कर बताता हूं कि आज तुमने यह रिकॉर्ड बनाया, या तोड़ा।

तीनों फॉर्मे में कप्तान बनने के बाद क्या बदलाव देख रहे हैं?
वह बहुत पॉजिटिव हो गया है। जिम्मेदारी मिलने के बाद तो और बेहतरीन पारियां खेली है। कप्तानी भी बेहतर कर रहा है। टीम को बहुत आगे लेकर जाएगा।

लेकिन, पिछली पांच पारियों से उनका बल्ला तो नहीं चल रहा?
इस पारी में फिटनेस का मुद्दा था, कि वह पूरी तरह ठीक नहीं था। हो सकता है इसी वजह से स्कोर नहीं कर पाया हो। बंगलुरु में दूसरी पारी में वह गलत निर्णय के शिकार हुए थे। यह चिंता की बात नहीं है। इस साल वह अभी तक 1200 रन बना चुके हैं। चार डबल सेंचुरी बनाए हैं। आप देखियेगा धर्माशाला में वह डबल सेंचुरी जरूर बनाएंगे।

धौनी के साथ वाकई कभी खराब संबंध थे विराट के?
मैं इसके लिए मीडिया को ब्लेम करुंगा। वह हमेशा से धौनी को अपना बड़ा भाई मानता रहा है। दोनों एक दूसरे की बहुत इज्जत करते हैं। धौनी ने शुरुआती दौर में उनको बहुत मदद की है।

जेएससीए स्टेडियम के बारे में क्या कहना है?
बहुत सुंदर और अल्ट्रामॉडर्न है। मैं चाहूंगा कि मैदान थोड़ा और मुलायम हो जाए। क्योंकि वह मुझे थोड़ा कड़ा दिख रहा था।

पांच दिन मैच खिंचेगा अब?
अब तो हर हाल में जाएगा। भारत के चार विकेट बचे हैं, ऑस्ट्रेलिया दूसरी पारी खेलेगी। यह बहुत अच्छी बात है। अब पिच पर होनेवाली फजूल की बातें रुक जाएगी।

गुरु महान होता है या उसका शिष्य उसको महान बनाता है?
दोनों एक दूसरे के लिए बलिदान देते हैं। बहुत योगदान करते हैं। मैं खुशकिस्मत हूं कि उसने पुरी दुनिया में मेरा नाम कर दिया। इसका क्रेडिट उसकी मेहनत और काम करने के तरीके को जाता है।

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