राहुल गांधी के साथ कभी मंच साझा नहीं कर सकता : केजरीवाल

साल 2017 में बार - बार झारखंड आऊंगा। अभी पंजाब चुनाव में थोड़ा बिजी हूं, इससे फ्री होने के बाद झारखंड पर ध्यान देना है। झारखंड में मैं पार्टी को लेकर गंभीर नहीं हूं। राज्य को लेकर गंभीर हूं। संगठन की मजबूती से ज्यादा मतलब राज्य की मजबूती से है। हम देश के लिए काम करते हैं। पार्टी के लिए नहीं। यह कहना है दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का। उन्होंने गुरुवार को स्टेट गेस्ट हाउस में खास बातचीत की। पेश है अंश ...



कैशलेस इंडिया के क्या परेशानी है? 
परेशानी कैशलेस इंडिया से नहीं है। इस पूरी कवायद से है। हाल के दिनों में कुल 63 उद्योगपतियों को मोदी सरकार ने छह हजार करोड़ का फायदा पहुंचाया है। एक लाख 14 हजार करोड़ रुपया केवल दो साल में ऋण माफ किया।

सहारा से पीएम के संबंध की बात कर रहे हैं, उसी सरकार में वह जेल में भी हैं? 
वह मोदी जी की वजह से जेल नहीं गए। उनके खिलाफ सबूत सुप्रीम कोर्ट के पास पहुंच गया, और उनका भ्रष्टाचार सामने आ गया। शुक्र मनाइए कि इस देश में न्याय व्यवस्था मजबूत है। तभी ऐसे लोग जेल जा रहे हैं।

राहुल गांधी अप्रोच करेंगे तो क्या आप दोनों नोटबंदी के खिलाफ एक मंच पर आएंगे? 
ऐसा कभी नहीं हो सकता, क्योंकि नोटबंदी से घोटाले की बात हम पिछले एक महीने से कर रहे हैं। उन्होंने उसी बात को दोहराना शुरू किया है। वह बीजेपी को बेनकाब करना ही नहीं चाहते, क्योंकि खुद भी तो वही काम कर रहे हैं। हम एक माह से बोल रहे थे तो मीडिया दिखा नहीं रहा था, अब राहुल बोल रहे हैं तो किसी को परेशानी नहीं है।

मोदी ने कहा कि राहुल गांधी अभी बोलना सीख रहे हैं, क्या कहेंगे? 
दोनों में मियां - बीवी का खेल चल रहा है। दोनों एक दूसरे के साथ केवल मजाक करते हैं। यही तो हम जनता को बताना चाहते हैं कि दोनों के झांसे में ना आएं। एक ने सहारा से घूस की बात छुपा ली, दूसरे ने वाड्रा को बचाने का प्रयास किया।

(...इस बीच एक फोन आता है। उनका जवाब होता है अरे यह तो गजब हो गया। यह फोन दिल्ली के राज्यपाल नजीब जंग का था। बाहर जाकर बातचीत करते हैं। अंदर आकर मुस्कुराते हुए बताते हैं कि नजीब जंग साहब ने इस्तीफा दे दिया है। कह रहे थे कि इसके बारे में काफी समय से सोच रहे थे। परिवार के संग समय बिताना चाहते हैं। इसलिए इस्तीफा दिया है। अब देखिये केंद्र सरकार किसको बिठाती है। दिल्ली जाकर मिलते हैं उनसे)

हमेशा सरकार सही से नहीं चला पाने का रोना रोते हैं, फिर किस लिहाज से पंजाब में सरकार बनाने की सोच रहे हैं? 
पंजाब पूरा स्टेट है। वहां दिल्ली की तरह पुलिस विभाग, एंटी करप्शन ब्यूरो केंद्र सरकार के पास नहीं है। रही बात सरकार बनाने की तो वहां अकाली दल के साथ मुकाबला है। कांग्रेस और बीजेपी दृश्य में नहीं है। लोग अकाली दल से परेशान हैं। जहां तक चंडीगढ़ म्यूनिसिपल कॉरपोरेशन के परिणाम में बीजेपी के आने की बात है तो आम आदमी पार्टी लड़ी ही नहीं थी।
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