जब पकड़ा गया असली जीतन मरांडी : कहानी जीतन मरांडी की भाग पंद्रह

जीतन मरांडी की पत्नी अपर्णा मरांडी

प्रेम संबंध
अपर्णा भी संस्कृतकर्मी थी, गिरिडीह की ही। कार्यक्रमों के सिलसिले में उनसे मिलना-जुलना होता रहता था। किसी और की तरह वह भी मेरे लिए साथी थी। वह मेरे काम से प्रभावित थीं। एक बार कोलकाता गए थे। रात में वर्दमान स्टेशन पर रुकना पड़ा। सभी साथी सो गए। मैं अपने को जिम्मेदार मानते हुए उनके सामानों पर निगरानी रखने के लिए जगा रहा। अपर्णा भी जगी थीं। मेरे पास आईं। बोलना चाहती थीं, बोल नहीं पा रही थीं। फिर, वही आगे बढ़ी और बोलीं। बात 2001 के आसपास की है। बोलीं, जीवनसाथी बनना चाहती हूं। मैंने कहा कि सोचने का मौका दीजिए। फिर हम दोनों ने अपने संगठऩ के लोगों से इस मसले पर बात की। एक दिन बस माला पहना कर एक-दूसरे के जीवनसाथी बन गए। हम साथ रहने लगे।

कौन था दूसरा जीतन मरांडी
मार्च में मैं रिहा हुआ था। मई में अखबार में पढ़ने को मिला कि असली नक्सली जीतन मरांडी पकड़ाया। जीतन मरांडी उर्फ श्यामलाल किस्कू। दुमका के एसपी हेमंत टोप्पो ने स्वीकार किया कि मैं निर्दोष था। स्पेशल ब्रांच ने भी मुझे निर्दोष समझा, लेकिन एक बार फिर मुरारी लाल मीणा का बयान छपा कि दोनो जीतन मरांडी चिलखारी में दोषी है। हां, वही असली था, यह मुझे नहीं पता। इस बीच गिरिडीह के जिस जिलाधिकारी ने मुझपर सीसीए लगाने की सिफारिश की थी, उन्होंने मिलने की इच्छा जाहिर की। उनका नाम दिप्रवा लकड़ा था। मैंने पूछा कि क्यों लगाया सीसीए। रिहाई के बाद भी एक साल जेल में रख दिया तो बोले कि मैं सरकार का नौकर हूं। सच्चाई जानते हुए भी मुझे ऐसा करना पड़ा। फिर उन्होंने इलाके के विकास में मदद करने को कहा।

केस स्टेटस
सन् 1999 में पहला केस, हजारीबाग में, अभी कुछ पता नहीं क्या हुआ उस केस का। न तो कोर्ट से नोटिस आता है और न मैं सुनवाई के लिए जाता हूं।
सन् 2003 में दूसरा केस, पटना में, अभी ट्रायल पर है। हालांकि, उस केस के कोई अभियुक्त संपर्क में नहीं है। कोर्ट से भी कोई सूचना नहीं आती है।
सन् 2005 में तीसरा केस, धनबाद में, अभी ट्रायल पर है। गवाही चल रही है। कभी–कभी जाता हूं।
सन् 2008 में चौथा केस, चिलखारी कांड, लोअर कोर्ट से फांसी। हाईकोर्ट से बरी, सुप्रीम कोर्ट ने सरकार के अपील को ठुकरा कर हाईकोर्ट के फैसले को सही ठहराया है।
इसके अलावा तीसरी थाना में एक केस चल रहा है मर्डर, मुठभेड़ और प्रतिबंधित संगठन के साहित्य रखने का। हालांकि, पुलिस को आज तक कभी मेरे पास प्रतिबंधित साहित्य मिला ही नहीं।
पीरटांड़ थाना में एक्सप्लोसिव बरामदगी का केस चल रहा है। दोनों ट्रायल पर है।

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