संस्कृतिकर्मी क्यों सरकार या पुलिस के लिए खतरा बनते हैं : कहानी जीतन मरांडी की भाग तेरह

वरवरा राव, दक्षिणपंथी कवि

संघर्ष ही जीतन मरांडी की शिक्षा है 

इस पर वरवरा राव कहते हैं कि एक लेखक हैं जॉर्ज थॉमसन। उन्होंने अपनी किताब मार्क्सिज्म एंड पोएट्री में लिखा है कि क्रांति का संदेश क्रांतिकारी जनता तक पहुंचाना होगा। क्रांतिकारी जनता होते हैं किसान और मजदूर। ये अधिकतर अनपढ़ होते हैं। उनतक पहुंचने के लिए सबसे अधिक सहायक है गाना, नाटक और सांस्कृतिक कला रूप। इसे पहुंचाने का जो काम कर रहा है, वह है जीतन मरांडी। वह है जीएन साईं बाबा। जीतन एक ऐसा क्रांतिकारी है, जिसने स्कूल में नहीं बल्कि अपने जीवन से सीखा है। उसका संघर्ष ही उसकी शिक्षा है। वह अपने जैसे आदिवासियों और दलितों को जगाने का काम कर रहे हैं। इसलिए सरकार को उनसे खतरा महसूस हो रहा है।

जिस लोकतंत्र की वह बात कर रहे हैं, उसमें लोक है ही नहीं

हाल ही में गृह मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट में एक एफिडेविट दाखिल किया है, जिसमें उसने कहा है कि जंगलों में रहनेवाले हथियारबंद लोगों से अधिक खतरनाक बाहर रहकर गानेवाले, लिखनेवाले लोग हैं। इनपर भी नियंत्रण होना चाहिए। यही वजह है कि जीएन साईं बाबा, जो कि 90 फीसद डिसेबल्ड हैं, उन्हें 14 महीने जेल में रखने के बाद फिर से नागपुर सेंट्रल जेल में डाल दिया है। वह भी अंडा सेल में। जहां तक सवाल है बाबूलाल मरांडी का, यह कहना कि माओवादी लोकतंत्र की हत्या करना चाहते हैं, यह गलत है। जिस लोकतंत्र की वह बात कर रहे हैं, उसमें लोक है ही नहीं, है तो केवल लोकतंत्र के नाम से चलनेवाला सिस्टम। यहां लोक के बारे में क्या है। यदि कुछ होता तो जीतन जैसे लोगों को क्रांति करने की जरूरत ही नहीं पड़ती। यहां तंत्र नहीं षडयंत्र हो रहा है।

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