रांची से 40 किमी दूर के ग्रामीणों ने आज तक नहीं पिया चापाकल का पानी

रांची से लगभग 40 किलोमीटर दूर अनगड़ा ब्लॉक के रासाबेड़ा गांव में 250 की जनसंख्या ने आज तक चापाकल का पानी नहीं पिया है। करमटुंगरी कामताटोला में ग्रामीण घरों से लगभग आधा किलोमीटर नीचे उतर कर चूंआ से पानी भरकर घरों में जमा करते हैं। कोयनारडीह में एक हजार की जनसंख्या पर मात्र 2 चापाकल, सिंगारी मध्य विद्यालय में 500 बच्चों के लिए एक भी चापाकल नहीं।

वहीं हाल ही में झारखंड सरकार ने पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए 100 करोड़ से अधिक का बजट पास किया है। जोन्हा फॉल भी इसका हिस्सा होगा। कहने को यहां फॉल है, लेकिन इसके आसपास के गांवों में चापाकल नहीं होना, सबसे बड़ी समस्या है। जानवर भी वहीं पानी पीते हैं। लोग तो अभ्यस्त हो ही चुके हैं। खराब पानी से होनेवाले बीमारियों के भी।

रासाबेड़ा – गांव के सावना बेदिया के मुताबिक पूरे गांव का वोट 200 रुपया में बिकता है। अधिकारियों के नाम पर प्रेमलता मुर्मू केवल यहां तक पहुंची है। नेता? नहीं। दो साल पहले टांरी (जहां गड्ढे में पानी जमा किया जाता है) तक पहुंचने के लिए लोगों ने श्रमदान कर पत्थर को तोड़ा, पानी लाने का रास्ता बनाया। भैंस, बकरी, गाय और इंसान, सब साथ में पानी पीते हैं, नहाते हैं। यहां केवल पैदल ही पहुंचा जा सकता है। राजदूत मोटरसाइकिल भी बीच रास्ते में साथ छोड़ सकती है। बीमार होने पर लोग परिजनों को खाट पर लादकर मुख्य सड़क तक पहुंचते हैं।

480 छात्रों वाले स्कूल में चार महीने से खराब है चापाकल मध्य विद्यालय, सिंगारी – प्राचार्या शांति मजेला तिर्की के मुताबिक विद्यालय में कुल 480 छात्र – छात्राएं हैं। दो चापाकल पिछले 4 माह से खराब। बच्चे विद्यालय से 100 मीटर दूर बने कुंआ से पानी लाते हैं। इसी पानी का खाना बनता है, पीते भी हैं। मुखिया, विद्यालय प्रबंधन समिति, बीडीओ और विधायक तक गुहार लग चुके हैं। बच्चे गंदा पानी पीने को अभ्यस्त हो चुके हैं।

करम टुंगरी, कामता टोला – यहां लगभग 250 लोगों के लिए टांरी एकमात्र सहारा। गांव के बहराई मुंडा और मासी बेदिया के मुताबिक यहां तक पहुंचने के लिए पत्थरों वाली संकरी गली, वह भी घरों से लगभग आधा किलोमीटर दूर। ढ़लान पर। शादी ब्याह के समय दस नौजवानों को केवल पानी लाने के लिए तैनात किया जाता है। यहां तीन साल पहले लगा एक चापाकल, वह पिछले एक साल से खराब। विधायक और मुखिया का नाम नहीं सुनना चाहते हैं।

कोयनारडीह – गांव के बच्चे गौतमधारा स्कूल तक पहुंचने के लिए इस रास्ते के बजाय हर दिन जोन्हा फॉल का 620 सीढ़ी चढ़ना पसंद करते हैं। इसमें चौथी क्लास से 8वीं तक के छात्र-छात्राएं शामिल हैं। 7वीं तक के छात्रों को साइकिल मिलना नहीं है, 8वीं वाले को इसका अभी तक इंतजार है। उतरना भी। लगभग एक हजार की जनसंख्या के लिए दो चापाकल। अधिकतर लोग दो टांरी पर आश्रित। धर्मनाथ बेदिया के मुताबिक कहने को 10 चापाकल लगाए गए हैं, सभी पिछले 3 साल से खराब। लोगों को मुख्य सड़क तक पहुंचने के लिए पांच किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है।

जिम्मेदार लोगों को बोल  रामटहल चौधरी, सांसद, रांची – रासाबेड़ा कहां पर है, हमको नहीं पता। जब वहां रोड नहीं है तो आदमी जाएगा कैसे। चापाकल का लिस्ट मंगवाए थे। विभाग को भी लिखे थे। अभी दिल्ली में हैं, आते हैं तब सोचते हैं, क्या करना है।

रामकुमार पाहन, विधायक, खिजरी – करमटुंगरी मेरे इलाके में पड़ता है। चापाकल खराब है, इसकी जानकारी हाल ही में मिली है। एक हफ्ते के भीतर यह ठीक हो जाएगा। आप दुबारा आकर देख सकते हैं।

अमित महतो, विधायक, सिल्ली – एक हफ्ते के अंदर सिंगारी स्कूल और कोयनारडीह का चापाकल ठीक हो जाएगा। रासाबेड़ा के लिए बस थोड़ा टाइम दीजिए। इससे पहले इस बात के लिए पेयजल स्वच्छता विभाग को लिखा था। उनका कहना था कि बरसात के बाद ठीक करेंगे। लेकिन हम इस पर पहले कार्रवाई करने जा रहे हैं।

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