कौन हैं यह मालिनी अवस्थी? क्या किया है उन्होंने? : मनोज तिवारी

बाएं से – पाखी हेगड़े, मनोज तिवारी, हुमा कुरैशी

भोजपुरी सिनेमा के स्टार मनोज तिवारी बातचीत में मृदुल हैं। लेकिन देश की स्थिती को लेकर चिंतित भी हैं। सिनेमा के साथ अब राजनीतिक पारी खेलने का मन बना चुके हैं। मालिनी अवस्थी को भोजपुरी का ब्रांड एंबेसडर बनाए जाने से खफा हैं। हाल ही में भाजपा में शामिल हुए मनोज से कई मसलों पर बातचीत हुई। पेश है बातचीत के अंश 

24 नवंबर 2014

भोजपुरी सिनेमा सही ट्रैक पर है ? 
हां। लेकिन पूरी तरह से है, ऐसा मैं नहीं कह सकता। डायरेक्शन, कहानी और स्क्रीन प्ले पर काम करने के साथ-साथ इसमें थोड़ी गरिमा और लाने की जरूरत है।

राजनीति में स्टारडम भुनाना है या कुछ करना भी है? 
सच में कुछ करना चाहता हूं। जिन लोगों ने मुझे अच्छा जीवन दिया है, उनको मैं अच्छा जीवन देना चाहता हूं। देश में निराशा का माहौल है, ऐसे में लोगों को मोटीवेट करना होगा। हाथ पर हाथ धरे बैठने से काम नहीं चलने वाला है। देश की समृद्धि के लिये काम करना होगा। और वह मैं दिल से कर रहा हूं।

विचारधारा के मामले में किस पार्टी और नेता के नजदीक हैं? 
आज हम किसी एक विचारधारा में बंधकर नहीं रहना चाहते हैं। हमने गांधी, जयप्रकाश, लोहिया, हेडगेवार को देखा है। ऐसे में सबकी अच्छाइयों को लेकर चलना होगा।

आम आदमी पार्टी के बजाय बीजेपी क्यों?
आप को अभी पार्टी के रूप में नहीं आना चाहिये था। उसे नरेंद्र मोदी का सपोर्ट करना चाहिये था। वह कांग्रेस के फूट डालो राज करो नीति का शिकार हुआ है।

मालिनी अवस्थी के ब्रांड एंबेसडर बनने से भोजपुरी को क्या नुकसान होगा? 
जिसको बनाना है बना दे न। कौन हैं यह मालिनी अवस्थी? क्या किया है उन्होंने? हम तो भोजपूरी में शारदा सिन्हा और भरत शर्मा व्यास को जानते हैं। भोजपूरी का आदर्श होना चाहिये ब्रांड एंबेसडर, घास-भूसा नहीं।

चुनाव की क्या तैयारी है? 
मेरा उद्देश्य नरेंद्र मोदी के लिये काम करना है, उनको पीएम बनाने के लिये जो कुछ करना होगा करूंगा। पार्टी बोलेगी चुनाव लड़ने के लिये, तो जरूर लड़ंगा।

आपके क्रिकेट मंदिर का क्या हुआ? 
बनकर तैयार हो गया है। 24 दिसंबर को मूर्तियां लग जायेंगी। उसमें सचिन, धौनी और युवराज की मूर्तियां रहेंगी।

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