कोच बनने को फेडरेशन के कर्ताधर्ता के पैर नहीं पकड़ूंगा : पिल्लई

हॉकी आइकॉन धनराज पिल्लई का मानना है कि भारत की हॉकी पहले से और कमजोर हो गई है। हॉकी इंडिया लीग (एचआइएल) के बारे में इनका मानना है कि इससे खिलाड़ियों की आर्थिक स्थिति तो सुधर रही है, लेकिन भारत की हॉकी को कोई फायदा नहीं है। भारतीय टीम की कोचिंग व्यवस्था और खिलाड़ियों के प्रदर्शन को देखकर इस पूर्व खिलाड़ी के मन में दर्द उठता है। कहते हैं भारतीय टीम को विदेशी कोच की जरूरत नहीं है। देश में ही कई पूर्व खिलाड़ी हैं जो बोहतर कोच बन सकते हैं। प्रस्तुत है हॉकी आइकॉन से बातचीत के अंश…

29.जनवरी 2014

फोटो क्रेडिट – दिवाकर प्रसाद

भारत की हॉकी आज किस स्थिति में है? 
बेहद खराब। हिन्दुस्तान की हॉकी में पिछले 10 सालों में कोई बदलाव नहीं आया। हाल ही में हुए वर्ल्ड सीरीज में छह में से चार मैचों में हमें हार मिली। यह दर्शाता है कि हम भविष्य के लिए भी तैयार नहीं हैं। जूनियर वर्ल्ड कप में भी हम 10वें स्थान पर रहे।

क्या कारण है?
बार-बार कोच बदलना सबसे बड़ी वजह है। विदेशी कोचिंग भी भारत की जरूरत नहीं। कम से कम जूनियर टीम में तो देशी कोच होना ही चाहिए। 2004 के बाद चार विदेशी कोच आ गए। कोचिंग कैंप, फिटनेस कैंप का कम होना भी बड़ा कारण है। खिलाड़ियों का बैकअप तैयार नहीं किया जा रहा है। हॉकी के हुक्मरानों को समझना होगा कि हमारे अधिकांश खिलाड़ी गांवों से हैं। ऐसे में कोच से मेल जोल बढ़ाते तक कोच बदल जाते हैं, स्थिरता कहां से आएगी।

सुधार के क्या उपाय हो सकते हैं?
सबसे पहले तो विदेशी कोच का फंडा बदला जाए। कंडिशनिंग कैंप और कोचिंग कैंप बढ़ाए जाएं। यहां सालों भर टूर्नामेंट होते हैं, इसे कम करना होगा और खिलाड़ियों की फिटनेस पर ज्यादा काम करना होगा। साल भर टूर्नामेंट होते रहे, लेकिन एक भी पोडियम हमने फिनीश नहीं किया है।

क्या आप भारतीय टीम को कोचिंग करने का इरादा रखते हैं?
अब नहीं करूंगा तो कब करूंगा? लेकिन इसके लिए फेडरेशन के कर्ताधर्ता के पैर नहीं पकड़ूंगा। विदेशी खिलाड़ी जो हमसे जूनियर थे, अपने देश को आज कोचिंग दे रहे हैं। मेरा हॉकी इंडिया से तालमेल बैठता ही नहीं। इससे ज्यादा दुर्भाग्यपूर्ण क्या होगा।

एचआइएल से इंडियन हॉकी को क्या मिला?
इससे सिर्फ प्लेयर को मिला हॉकी को नहीं। यह सच है कि खिलाड़ियों की आर्थिक स्थिति सुधरी है और उन्हें क्रिकेटरों जैसी पॉपुलैरीटी मिल रही है, लेकिन भारत की हॉकी को कुछ नहीं मिला। एक साल में मनदीप सिंह को छोड़कर कोई बड़ा खिलाड़ी सामने नहीं आया। टीम में हमारे युवा खिलाड़ियों को कम मौके मिलते हैं। हर टीम में ज्यादातर विदेशी खिलाड़ी ही प्लेइंग इलेवन का हिस्सा होते हैं।

आप के बाद इंडिया को पेनल्टी शूट स्पेशलिस्ट नहीं मिला। वजह?
हां देश के लिए 14 साल मैं भागता रहा। इसके लिए जरूरी है कि आप गोली को एक दिशा देते हैं, और आप अपने दिशा में भागते हैं। मैंने पूरी लाइफ में ग्लब्स और बॉल गार्ड नहीं पहना। आज के हॉकी में हर लड़का इसके बिना खेलता ही नहीं है। मुझे लगता है डर कर खेलने से आप अपना 100 परसेंट नहीं दे सकते हैं।

Please follow and like us:

Comment via Facebook

comments