मेरी आवाज में ऑटो ट्यूनिंग सॉफ्टवेयर की दीमक नहीं : शान

मखमली आवाज के मालिक शान किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। 17 साल की उम्र से गाना गा रहे इस सिंगर ने निकम्मा किया इस दिल ने, चांद सिफारिश, बहती हवा सा था वो… जैसे गाने लोगों को दिये हैं। नए-नए डांसर बने शान एक कार्यक्रम के सिलसिले में रांची आये थे। बातचीत के अंश…

15 नवंबर 2013

सिंगिंग में ज्यादा मेहनत है या डांस में?
सिंगिंग में ज्यादा मेहनत कहां है। उसमें तो मजा है। क्योंकि मैं डांसर नहीं हूं, तो वह ज्यादा मुश्किल लगा मुझे।

भाषा को समझे बिना गाना कितना मुश्किल है?
भाषा, कल्चर को समझे बिना ओरिजनल फील लाना मुश्किल है। फिर भी लोग गवाते हैं। आजकल टॉलीवुड और अन्य इंडस्ट्री के 70 प्रतिशत गाने बॉलीवुड के सिंगर ही गाते हैं। लेकिन मैं इसे पसंद नहीं करता।

शहीद सम्मान समारोह में नागपुरी गाना गाने का आइडिया कहां से आया?
रांची में था तो नागपुरी गाना ही था। (हंसते हुए) यह इस तरह फ्लॉप होगा, पता नहीं था। लेकिन मजा आया।

सिंगिंग ऑटो ट्यूनिंग सॉफ्टवेयर के सहारे चलने लगा है?
बिल्कुल। अब हर कोई गा ले रहा है। इससे आवाज का मतलब खत्म हो जाता है। वह मशीन हो जाता है। भगवान का शुक्र है कि अब तक मेरी आवाज में ऑटो ट्यूनिंग सॉफ्टवेयर की दीमक नहीं लगी है।

रियलिटी शो के सिंगर, शो के बाद मार्केट में दिखते क्यों नहीं?
वह शो से मिली पॉपुलैरिटी को सक्सेस मान लेते हैं। इससे इनका संतुलन खो बैठता है। सक्सेस लॉंग टर्म में मिलता है। वह आपके साथ हमेशा रहती है। इन गायकों को जज भी ज्यादा चढ़ा देते हैं। लेकिन उनमें टैलेंट तो जरूर होता है।

शान खुद किसको सुनना पसंद करते हैं?
किशोर कुमार को। अभी के गाने न्वॉइजी होते हैं। उनसे जुड़ना मुश्किल होता है। मेरी कोशिश रहती है कि गाने ऐसे गाऊं, जिससे लोगों को लगे कि मैं उनके लिये गा रहा हूं।

रांची दूसरी बार आए हैं, कैसा लगा?
जिस शहर को दुनिया मान लेती है, उसमें आगे बढ़ने की तड़प नहीं होती है। रांची में वह तड़प है। यहां के लोगों में वह आग है कि बाहर निकल कर कुछ करें।

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